इससे पहले बीपी कानूनगो को एक साल का सेवा विस्तार मिला था. वे पिछले साल ही रिटायर होने वाले थे लेकिन सरकार ने उन्हें साल भर के लिए रोक लिया. इस साल 2 अप्रैल को वे रिटायर हो गए और टी रबि शंकर को उनकी जगह पर लाया गया है. केंद्रीय कैबिनेट की अपॉइंटमेंट कमेटी ने शनिवार को टी रबि के नाम पर फैसला किया. टी रबि शंकर का कार्यकाल 3 साल का होगा.
टी रबि शंकर के अलावा रिजर्व में तीन और डिप्टी गवर्नर हैं.
इनके नाम हैं- माइकल डी पात्रा जो मॉनेटरी पॉलिसी से जुड़ा विभाग संभालते हैं, इसके बाद हैं मुकेश कुमार जैन जो पहले कॉमर्शियल बैंकर रहे हैं, तीसरे डिप्टी गवर्नर हैं राजेश्वर राव. शंकर रिजर्व बैंक में उन विभागों को संभालेंगे जिसे कानूनगो देखते रहे हैं. इसमें फिनटेक, इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी, पेमेंट सिस्टम और रिस्क मॉनिटरिंग शामिल है.
टी रबि शंकर बहुत पहले से रिजर्व बैंक से जुड़े रहे हैं. उन्होंने 1990 में बतौर रिसर्च ऑफिसर रिजर्व बैंक की नौकरी जॉइन की. शंकर बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से पढ़े लिखे हैं और वहीं से साइंस और स्टैटिस्टिक्स में मास्टर्स डिग्री प्राप्त की है. उनकी लिंक्डइन पोस्ट से जाहिर है कि उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ से डेवलपमेंट प्लानिंग में डिप्लोमा लिया है.
टी रबि शंकर पिछले साल ‘इंडियन फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी एंड एलायड सर्विसेज’ के चेयरमैन नियुक्त किए गए थे. यह संस्था रिजर्व बैंक की सहयोगी संस्था है. इससे पहले शंकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई संस्थाओं में काम कर चुके हैं. वे पूर्व में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से भी जुड़े रहे हैं. वे आईएमएफ में भारत सरकार की तरफ से बॉन्ड मार्केट से जुड़े मामले देखते थे. टी रबि शंकर सेंट्रल बैंक ऑफ बांग्लादेश के साथ भी काम कर चुके हैं.
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टी रबि शंकर रिजर्व बैंक में कई अहम काम संभाल चुके हैं जिनमें ऋण प्रबंधन या डेट मैनेजमेंट जैसी जिम्मेदारी भी शामिल है. ये काम पहले कानूनगो देखते थे लेकिन अब शंकर के जिम्मे होगा. देश-दुनिया के अर्थशास्त्रियों में टी रबि शंकर का बहुत नाम है. वे किसी भी आर्थिक मसले पर अपना मौलिक विचार रखते हैं और उसी को आधार बनाते हुए आगे बढ़ते हैं. शंकर ने रिजर्व बैंक की कई ऐसी कमेटियों में काम किया है जिसकी अहम भूमिका देखी गई है. जैसे फंड आधारित लेंडिंग सिस्टम, कमोडिटी प्राइस की हेजिंग, कमोडिटी स्पॉट, डेरिवेटिव्स मार्केट के साथ ही वे बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट में भी काम कर चुके हैं. ये काम कैपिटल और डॉलर फंडिंग से जुड़े रहे हैं.
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